1 अप्रैल 2026 से कानून बदल गया है
साठ साल से ज़्यादा समय तक भारत का इनकम-टैक्स कानून इनकम-टैक्स एक्ट, 1961 था। 1 अप्रैल 2026 से उसकी जगह इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 ने ले ली है। नए एक्ट पर सरकार का अपना नोट कहता है कि यह 1 अप्रैल 2026 से लागू है, और इसमें धाराएँ कम हैं, इसलिए आपके CA जो धारा नंबर बोलते थे, उनमें से ज़्यादातर बदल गए हैं।
काउंटर पर यह इसलिए मायने रखता है क्योंकि पोस्टर, WhatsApp फ़ॉरवर्ड और पुराने सॉफ्टवेयर में अब भी पुराने धारा नंबर लिखे हैं। बात ज़्यादातर वही है, पर CA से बात करते समय या नोटिस पढ़ते समय नए नंबर इस्तेमाल करें। इस गाइड में हम 2025 का एक्ट वैसे ही बता रहे हैं जैसा 21 अगस्त 2025 को भारत के राजपत्र में छपा, और फ़ाइनेंस एक्ट, 2026 से हुए बदलावों के साथ।
शुरू करने से पहले एक सच्ची बात: हम गज़ट में एक्ट खोल पाए, पर इनकम-टैक्स रूल्स, 2026 का पूरा पाठ किसी सरकारी साइट पर नहीं खोल पाए। जहाँ कोई आँकड़ा सिर्फ़ रूल्स में है, वहाँ हम साफ़ बताते हैं और अंदाज़ा नहीं लगाते। ऐसी बातें आपके CA आपकी शॉप के लिए पक्की करें।
ज्वेलरी शॉप के लिए ₹2 लाख की कैश लिमिट
इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 186 कहती है कि कोई भी व्यक्ति नीचे की टेबल के तीन तरीकों में से किसी में भी ₹2,00,000 या उससे ज़्यादा नहीं ले सकता, जब तक पैसा अकाउंट पेयी चेक, अकाउंट पेयी बैंक ड्राफ्ट, बैंक खाते से इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग सिस्टम, या रूल्स में तय किसी और इलेक्ट्रॉनिक तरीके से न आए।
यह नियम पैसा लेने वाले पर है, यानी आपकी शॉप पर। पेनल्टी ग्राहक नहीं भरता। धारा 451 के तहत लेने वाले पर पेनल्टी नियम तोड़कर ली गई पूरी रकम के बराबर हो सकती है। यानी ₹2.5 लाख की कैश बिक्री आपकी शॉप को ₹2.5 लाख की पड़ सकती है।
“या उससे ज़्यादा” पर ध्यान दें। ठीक ₹2,00,000 का कैश बिल भी इसमें आ जाता है। और एक बिक्री को दो बिलों में तोड़ने से कुछ नहीं बदलता: एक लेन-देन, एक दिन में एक व्यक्ति, और एक मौका, तीनों अलग-अलग गिने जाते हैं।
| कैसे गिना जाता है | काउंटर पर इसका मतलब | उदाहरण |
|---|---|---|
| एक व्यक्ति से एक दिन में | एक ग्राहक से एक दिन में लिया गया सारा कैश जोड़ा जाता है, सारे बिल मिलाकर। | ग्राहक उसी दिन चेन के लिए ₹1.2 लाख और झुमकों के लिए ₹90,000 कैश देता है: कुल ₹2.1 लाख, लिमिट से ऊपर। |
| एक लेन-देन | एक बिक्री एक लेन-देन है, कैश चाहे कितने भी दिनों या बिलों में आए। | ₹2.4 लाख का सेट, आज ₹1.2 लाख कैश और अगले हफ़्ते ₹1.2 लाख कैश। |
| एक मौका या अवसर | एक ही मौके के लिए एक व्यक्ति की खरीद जोड़ी जाती है, दिन अलग हों तब भी। | एक शादी के गहने तीन बार में कैश से खरीदे गए, कुल ₹2 लाख या ज़्यादा। |
कैश लिमिट से कौन बाहर है
धारा 186(2) में बस कुछ छूट हैं: सरकार, बैंकिंग कंपनी, पोस्ट ऑफ़िस सेविंग्स बैंक या को-ऑपरेटिव बैंक को मिली रकम; धारा 185 में पहले से आने वाले लोन, डिपॉज़िट और तय रकम; और वे लोग या रकम जिन्हें केंद्र सरकार नोटिफ़ाई करे। ग्राहक को ज्वेलरी बेचने वाली शॉप इस लिस्ट में नहीं है।
बैंक खाते से इलेक्ट्रॉनिक क्लियरिंग से, या रूल्स में तय इलेक्ट्रॉनिक तरीके से आया पेमेंट लिमिट से बाहर है। कैश इसमें आता है, और वे चेक और ड्राफ्ट भी जो अकाउंट पेयी नहीं हैं। बाकी इलेक्ट्रॉनिक तरीकों की लिस्ट एक्ट ने रूल्स पर छोड़ी है, इसलिए अपने CA से पक्का कर लें कि आपकी शॉप जो तरीके लेती है, जैसे UPI और कार्ड, वो उसमें हैं।
पुराने सोने के बदले का सवाल अक्सर आता है। कानून ली गई रकम की बात करता है; यह नहीं बताता कि पुराने सोने का बदला लिमिट में कैसे गिना जाए। एक्सचेंज वाले बिल के कैश हिस्से को कैसे देखें, यह अपने CA से पूछें।
ज्वेलरी बिल पर PAN: एक्ट क्या कहता है
एक्ट की धारा 262(9) दो कदमों में काम करती है। पहला, जो भी व्यक्ति कोई तय (प्रेस्क्राइब्ड) लेन-देन करता है, उसे उसके कागज़ों पर अपना PAN या आधार नंबर लिखना है और तय तरीके से उसे ऑथेंटिकेट करना है। दूसरा, जो भी व्यक्ति ऐसा कागज़ लेता है, उसे पक्का करना है कि PAN या आधार सही से लिखा और ऑथेंटिकेट हुआ है।
बिक्री में PAN ग्राहक देता है और आपकी शॉप उसे बिल या फ़ॉर्म पर लेती है, इसलिए दूसरी ज़िम्मेदारी आपकी है। धारा 467 में हर चूक पर ₹10,000 की पेनल्टी है: PAN न लिखने वाले पर, जानबूझकर गलत नंबर देने वाले पर, और उस लेने वाले पर जो इसे पक्का नहीं करता।
जिस ग्राहक ने आधार को PAN से जोड़ा है, वह धारा 262(7) के तहत PAN की जगह आधार नंबर दे सकता है। जिस ग्राहक के पास PAN नहीं है पर आधार है, वह भी आधार नंबर दे सकता है।
कौन-से लेन-देन “तय” हैं और कितनी रकम से ऊपर, यह इनकम-टैक्स रूल्स, 2026 में लिखा है, एक्ट में नहीं। यह गाइड लिखते समय हम उन रूल्स का सरकारी पाठ नहीं खोल पाए, इसलिए यहाँ ज्वेलरी के लिए कोई रकम नहीं दे रहे। मौजूदा लिस्ट, सामान की बिक्री पर लागू रकम, और बिना PAN वाले ग्राहक को कौन-सा डिक्लेरेशन फ़ॉर्म भरना है, यह अपने CA से पूछें।
2026 में ज्वेलरी की बिक्री पर TCS
टैक्स कलेक्टेड ऐट सोर्स (TCS) अब इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 394 में है। यह उन रकमों की टेबल है जिन पर टैक्स वसूलना होता है, ज़्यादातर लाइनों में बेचने वाले को। गज़ट में छपी और फ़ाइनेंस एक्ट, 2026 से बदली टेबल में ये हैं: शराब, तेंदू पत्ता, लकड़ी और वन उपज, स्क्रैप, कोयला, लिग्नाइट और लौह अयस्क, विदेश भेजा गया पैसा, विदेश टूर पैकेज, और पार्किंग, टोल प्लाज़ा, खदान और क्वारी। ज्वेलरी और बुलियन का इसमें नाम नहीं है।
एक लाइन ज़्यादा दूर तक जाती है: मोटर गाड़ी की, या केंद्र सरकार द्वारा नोटिफ़ाई किए गए किसी और सामान की ₹10 लाख से ऊपर की बिक्री पर 1% TCS। यह गाइड लिखते समय हमें ज्वेलरी का नाम लेने वाला कोई नोटिफ़िकेशन नहीं मिला, पर नोटिफ़िकेशन कभी भी आ सकता है। आप जो बेचते हैं, उस पर कोई नोटिफ़िकेशन है या नहीं, यह अपने CA से पक्का करें।
सामान की बिक्री पर पुराना TCS, यानी 1961 के एक्ट की धारा 206C(1H), 1 अप्रैल 2025 से बंद है। फ़ाइनेंस एक्ट, 2025 ने एक प्रावधान जोड़ा कि यह उप-धारा उस तारीख से लागू नहीं होगी। अगर कोई सप्लायर या सॉफ्टवेयर अब भी सामान पर 0.1% TCS जोड़ रहा है, तो वजह पूछें।
अगर कभी TCS लागू हो और न लिया जाए, तो धारा 449 के तहत असेसिंग ऑफ़िसर न लिए गए टैक्स के बराबर पेनल्टी लगा सकता है।
काउंटर पर क्या करें
- कैश को ग्राहक, दिन और मौके के हिसाब से गिनें। बिल के हिसाब से नहीं। शादी वाला परिवार तीन बार आए, तो भी मौका एक ही है।
- कैश ₹2 लाख से नीचे रोकें। ₹2 लाख या उससे ज़्यादा पर बाकी पैसा अकाउंट पेयी चेक, बैंक ट्रांसफ़र या उस इलेक्ट्रॉनिक तरीके से लें जो आपके CA ने पक्का किया हो।
- बिल पर हर पेमेंट का तरीका दिखाएँ। जिस बिल पर कैश, UPI और कार्ड अलग-अलग दिखें, वही आपका रिकॉर्ड है कि पैसा कैसे आया।
- जहाँ रूल्स कहें, PAN लें और जाँचें। लेने वाले के नाते जाँचना आपकी ज़िम्मेदारी है, और हर चूक पर ₹10,000 दाँव पर है।
- KYC कागज़ निजी रखें। PAN की कॉपी संवेदनशील है। उसे ग्राहक के रिकॉर्ड के साथ रखें, काउंटर पर या WhatsApp ग्रुप में नहीं।
- साल में एक बार CA से पूछें। रूल्स और नोटिफ़िकेशन बदलते रहते हैं। हर अप्रैल CA के साथ दस मिनट, एक पेनल्टी से सस्ते हैं।
CaratOS इसमें कैसे काम आता है
CaratOS आपके लिए टैक्स के फ़ैसले नहीं करता, पर रिकॉर्ड साफ़ रखता है। बिलिंग और पुराना सोना में एक बिल को कैश, UPI और कार्ड में बाँट सकते हैं, और बिल तभी पूरा होता है जब बँटवारा जुड़कर पूरा हो, ताकि हर तरीका रिकॉर्ड में रहे।
हर ग्राहक के बिल, पुराना सोना और बकाया ग्राहक में एक जगह रहते हैं, और उनके KYC कागज़ हर प्लान पर निजी रहते हैं। बकाया और पैसा में कैश बुक दिन का आया और गया कैश दिखाती है। आपके CA को आँकड़े देखने के लिए मुफ़्त रीड-ओनली लॉगिन मिलता है।
उसी बिल पर GST के लिए ज्वेलरी शॉप के लिए GST बिलिंग पढ़ें, और बिल पर क्या दिखना चाहिए, इसके लिए ज्वेलरी बिल फ़ॉर्मेट गाइड। प्लान ₹1,199 महीने से शुरू होते हैं, देखें प्राइसिंग, या डेमो बुक करें और पिछले हफ़्ते का कोई असली बिल साथ लाएँ।
शॉप मालिक जो पूछते हैं
भारत में ज्वेलरी के लिए ग्राहक कितना कैश दे सकता है?
इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 186 के तहत ज्वेलर एक व्यक्ति से एक दिन में, एक लेन-देन के लिए, या एक मौके के लिए ₹2 लाख या उससे ज़्यादा कैश नहीं ले सकता। इतनी या इससे ज़्यादा रकम अकाउंट पेयी चेक, अकाउंट पेयी ड्राफ्ट, बैंक क्लियरिंग या रूल्स में तय इलेक्ट्रॉनिक तरीके से आनी चाहिए। UPI और कार्ड जैसे तरीके रूल्स की लिस्ट में हैं या नहीं, यह अपने CA से पूछें।
ज्वेलर ₹2 लाख या ज़्यादा कैश ले, तो पेनल्टी कौन भरता है?
कैश लेने वाला, यानी शॉप। इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 451 के तहत असेसिंग ऑफ़िसर धारा 186 तोड़कर ली गई रकम के बराबर पेनल्टी लगा सकता है।
क्या ज्वेलरी खरीदने के लिए PAN ज़रूरी है?
इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 262(9) के तहत इनकम-टैक्स रूल्स, 2026 में तय लेन-देन पर PAN, या उसकी जगह आधार, देना होता है, और कागज़ लेने वाले ज्वेलर को पक्का करना होता है कि वह लिखा गया है। हम रूल्स का सरकारी पाठ नहीं खोल पाए, इसलिए कौन-से ज्वेलरी बिल और कितनी रकम इसमें आती है, यह अपने CA से पूछें।
क्या 2026 में ज्वेलरी की बिक्री पर TCS लगता है?
फ़ाइनेंस एक्ट, 2026 से बदली इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 394 की TCS टेबल में ज्वेलरी या बुलियन का नाम नहीं है। एक लाइन केंद्र सरकार द्वारा नोटिफ़ाई किए गए सामान की ₹10 लाख से ऊपर की बिक्री पर है, इसलिए आप जो बेचते हैं उस पर कोई नोटिफ़िकेशन है या नहीं, यह अपने CA से पूछें।
क्या सामान की बिक्री पर 0.1% TCS अब भी लगता है?
नहीं। फ़ाइनेंस एक्ट, 2025 ने तय किया कि 1961 के एक्ट की धारा 206C(1H), यानी सामान की बिक्री पर TCS, 1 अप्रैल 2025 से लागू नहीं होगी, और 2025 के एक्ट की TCS टेबल में ऐसी कोई लाइन नहीं है।
क्या ग्राहक बड़ी कैश खरीद को छोटे बिलों में बाँट सकता है?
इससे कोई फ़ायदा नहीं। धारा 186 एक व्यक्ति से एक दिन का सारा कैश, एक लेन-देन का सारा कैश, और एक मौके का सारा कैश जोड़कर गिनती है। ₹3 लाख की बिक्री को ₹1.5 लाख के दो कैश बिलों में बाँटने पर भी ₹3 लाख ही लिए गए।